पर्यटन मंत्री का भराड़ीसैण विधान सभा भवन परिसर में डेस्टिनेशन मैरिज का सुझाव

गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में बने भव्य विधानसभा भवन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वजह है राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सत्पाल महाराज का वह बयान, जिसमें उन्होंने इस भवन की उपयोगिता को पर्यटन और “डेस्टिनेशन मैरिज” से जोड़कर देखने की बात कही। मंत्री का यह सुझाव सामने आते ही सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है कि आखिर जिस भवन को राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था का केंद्र माना जाता है, उसे शादी-ब्याह के स्थल के रूप में देखने का विचार कहां तक उचित है। दरअसल गैरसैंण को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान राज्य की स्थायी राजधानी के रूप में देखने का सपना कई आंदोलनकारियों ने संजोया था। पहाड़ के लोगों का मानना रहा है कि गैरसैंण ही वह स्थान है, जहां से पहाड़ की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा और हल किया जा सकता है। इसी सोच के तहत यहां भव्य विधानसभा भवन का निर्माण किया गया और इसे राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दिया गया।
हालांकि हकीकत यह है कि इस विधानसभा भवन में सत्र बहुत कम दिनों के लिए ही आयोजित हो पाता है। ज्यादातर समय यह विशाल भवन खाली ही रहता है। अब इसी “खालीपन” के बीच पर्यटन मंत्री का डेस्टिनेशन मैरिज वाला सुझाव सामने आया है, जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया है।
मंत्री का तर्क है कि गैरसैंण का प्राकृतिक सौंदर्य और यहां का शांत वातावरण इसे पर्यटन की दृष्टि से बेहद आकर्षक बनाता है। यदि यहां बड़े आयोजनों और डेस्टिनेशन मैरिज जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए तो इससे पर्यटन को भी गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं।
लेकिन इस सुझाव ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक संस्थान को पर्यटन या निजी आयोजनों के लिए इस्तेमाल करने का विचार वास्तव में उचित है? आलोचकों का कहना है कि यदि सरकार की प्राथमिकता गैरसैंण को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना ही है, तो इसके लिए अलग से बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सकता है। विधानसभा भवन को शादी-ब्याह के आयोजन से जोड़ना उस संस्थान की गरिमा पर भी सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान इस बात की ओर भी इशारा करता है कि राज्य का पूरा सिस्टम गैरसैंण को लेकर कितना गंभीर है। जिस स्थान को कभी राज्य आंदोलनकारियों ने राजधानी के रूप में देखा था, आज उसी जगह की पहचान पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की बात कही जा रही है।
गैरसैंण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से बहस होती रही है। कई बार इसे स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है, तो कई बार यहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित करने की बात कही जाती रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि गैरसैंण अब भी प्रतीकात्मक राजधानी बनकर ही रह गया है। ऐसे में जब राज्य के वरिष्ठ मंत्री खुद विधानसभा भवन को डेस्टिनेशन मैरिज जैसे आयोजनों से जोड़कर देखने की बात करते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गैरसैंण की असली भूमिका क्या हैकृराज्य की राजनीतिक राजधानी या पर्यटन का नया प्रयोग?
फिलहाल मंत्री के बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग इसे गैरसैंण और विधानसभा की गरिमा के साथ मजाक के रूप में देख रहे हैं। उत्तराखंड आंदोलन की स्मृतियों और गैरसैंण के सपनों के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह “डेस्टिनेशन मैरिज” वाला विचार केवल एक बयान बनकर रह जाता है या वास्तव में किसी नई नीति की दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल इतना जरूर है कि गैरसैंण की राजनीति और उसकी उपयोगिता पर यह बयान फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।




