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विपक्ष के विरोध और वाकआउट के बावजूद लोकसभा में पास हुआ नागरिकता कानून में संशोधन का विधेयक

नई दिल्ली। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताडि़त अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक लोकसभा में पास हो गया। विपक्ष के विरोध और वाकआउट के बीच राजनाथ सिंह ने भरोसा दिया कि विधेयक संविधान के खिलाफ नहीं है और इससे तीन पड़ोसी देशों में प्रताडि़त होने वाले हिंदू, जैन, सिख, इसाई, पारसी और बौद्ध समुदाय अल्पसंख्यकों को राहत मिलेगी। गृहमंत्री ने कहा कि प्रताडि़त होने वाले ये अल्पसंख्यक भारत के अलावा किसी अन्य देश में नहीं जा सकते हैं।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह गलतफहमी फैलाने की कोशिश की जा रही है कि यह विधेयक सिर्फ असम के लिए है और इससे वहां के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्हें साफ किया कि यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। पूरा देश इसके बोझ को वहन करेगा और इसमें केंद्र सरकार राज्यों को पूरी मदद करेगी। उनके अनुसार इस विधेयक से पश्चिमी सीमा से आने वाले अल्पसंख्यक, जो राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों में सालों से रह रहे हैं, उन्हें राहत मिलेगी। राजनाथ सिंह ने बताया कि सालों से भारत में रह रहे पड़ोसी देशों से आए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा नागरिकता कानून के कारण उन्हें नागरिकता नहीं दी जा सकती है। सरकार ने इन्हें राहत देने के लिए 2015 और 2016 में लंबी अवधि की वीसा देने का काम शुरू किया था। प्रस्तावित विधेयक में भी नागरिकता देने के पहले छानबीन का पूरा बंदोबस्त किया गया है। इसके तहत केवल उन्हीं लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जिनके बारे में जिला प्रशासन और राज्य सरकार अनुमोदन करेगी। असम के स्थानीय निवासियों को आश्वस्त करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उनके हितों को सुरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत कैबिनेट असम के छह जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का फैसला ले चुकी है। यही नहीं, असम के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बोडो कचारी और अन्य इलाकों में रहने वाले काबरी को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिये जाने का विधेयक अलग से लाया जा रहा है। इसके साथ ही असम समझौते के छठे अनुच्छेद को लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति असम की संस्कृति को बचाए रखने के साथ ही वहां के विभिन्न स्थानीय समुदायों के लिए विधानसभा में सीटों के आरक्षण तक पर अपनी रिपोर्ट देगी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध किया। विपक्षी दलों की मुख्य आपत्ति थी कि यह विधेयक सांप्रदायिक आधार पर नागरिकता देने का काम करेगी, जो संविधान के मूल भावना के खिलाफ है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने विधेयक को समाज को बांटने वाला बताया। वहीं कांग्रेस ने कई राज्य सरकारों की ओर से विधेयक का विरोध का हवाला देते हुए इसे स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की और नहीं माने जाने पर सदन का वाकआउट किया।

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