ऑपरेशन ट्राइडेंट 31 दिसंबर, 2029 तक नशीले पदार्थों के हर नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम

देहरादून/नई दिल्ली। पूर्वोत्तर की पहाड़ियों में फैले घने जंगल, दुर्गम रास्ते और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे संवेदनशील इलाके। इन्हीं रास्तों के सहारे नशे का एक ऐसा काला कारोबार फल-फूल रहा था, जो भारत के युवाओं के भविष्य को निगलने के साथ देश की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन रहा था। तस्करों को लगता था कि सीमाओं की जटिलता और भौगोलिक परिस्थितियाँ उन्हें कानून की पहुँच से दूर रखेंगी। लेकिन वे शायद यह भूल गए थे कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले नेटवर्क को खत्म करने के लिए अब केवल छिटपुट कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत निर्णायक प्रहार किया जा रहा है।
इस रणनीति के केंद्र में हैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जिनकी पहचान एक सख्त प्रशासक और कुशल रणनीतिकार के रूप में रही है। आधुनिक भारत के चाणक्य अमित शाह के दूरदर्शी मार्गदर्शन और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की अगुवाई में 23 अक्टूबर, 2026 को केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों ने श्ऑपरेशन ट्राइडेंटश् के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 स्थानों पर छापेमारी की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के माध्यम से 38 टीमों ने सटीक समन्वय के साथ आइजॉल, चम्फाई, जोखॉथर, चुराचांदपुर और कछार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में छापेमारी की। ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ से म्यांमार, भारत और बांग्लादेश की सीमाओं के जरिए मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल के ठिकाने धराशायी हो गए। 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद जब्त हुए। यह कोई साधारण छापेमारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने का अभियान था। इसका उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह के संचालन तंत्र और उसके वित्तीय आधार को ध्वस्त करना भी था।
इस अभियान में वित्तीय जाल भी उजागर हुआ। शाह की रणनीति के तहत ऑपरेशन ट्राइडेंट में 100 करोड़ के हवाला लेनदेन का पता चला, 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए और 17.82 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। म्यांमार स्थित सरगना के नेतृत्व वाले इस गिरोह के पैसे के रास्ते बंद कर दिए गए। नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) के अनुरूप यह रणनीति सिर्फ जब्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे तंत्र को तोड़ने पर केंद्रित रही।




