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एलएसी पर जारी तनाव को दूर करने के लिये भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों की शुक्रवार देर रात मॉस्को में हुई बातचीत

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर करीब चार महीनों से जारी तनाव को दूर करने की राह तलाशने में जुटे भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों की शुक्रवार देर रात मॉस्को में बातचीत हुई। सीमा पर खूनी झड़प के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ता है। चीन की तरफ से ही इस बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था। 30 और 31 अगस्त को लगातार दो दिनों तक दोनों देशों के बीच सैन्य झड़पों के बाद चीन का रवैया बदला हुआ नजर आ रहा है। चुलूस में भी दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच बीते सोमवार से लगातार बातचीत जारी है।

बीजिंग ने रखा था वार्ता का प्रस्ताव  रक्षा सचिव अजय कुमार और रूस में भारतीय दूत डीबी वेंकटेश वर्मा भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।राजनाथ सिंह से द्विपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव चीनी पक्ष की तरफ से गुरुवार को आया था। राजनाथ सिंह की गुरुवार को एससीओ के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई थी। राजनाथ सिंह ने अलग से रूस के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की है। इसके बाद राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंगे की बातचीत हुई। फ‍िलहाल दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच हुई बातचीत का ब्‍यौरा सामने नहीं आया है।

बातचीत से ही समाधान  इस बीच विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने भी चीन के साथ चल रहे सैन्य विवाद का समाधान बातचीत से निकालने के विकल्प पर जोर दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा है कि, ‘भारत अपनी संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता को बरकरार रखने के लिए दृढ़ है। लेकिन हम किसी भी विवादित मामले का समाधान आपसी बातचीत से करने के लिए तैयार हैं।’ उन्होंने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में चीन के साथ सैन्य तनाव को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया और कहा कि इस तरह की चुनौती का सामना पिछले 40 वर्षो में भारत ने नहीं किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी एक दिन पहले कुछ इसी तरह की बात कही थी।

राजनाथ सिंह ने दिया सख्त संदेश  मास्को में एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में जिस तरह से सभी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही है, उसके भी खास मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए भरोसे का माहौल बनाने के साथ ही आक्रामक रवैये को खत्म करना और एक दूसरे के प्रति संवेदना जताना आवश्यक है। सिंह ने जब यह बात कही जो कुछ ही मीटर की दूर पर चीन के रक्षा मंत्री भी बैठे हुए थे।

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