Uttarakhand

आधुनिकतम यंत्रों के माध्यम से इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल कर रहा नैनी झील का तकनीकि अध्ययन

नैनीताल। देश-विदेश में आकर्षण का केन्द्र नैनी झील सरोवर नगरी नैनीताल की खूबसूरती का पर्याय है। नैनी झील के सौन्दर्य को लेकर सैलानी नैनीताल खिंचे चले आते हैं। सुन्दर झील की लहरें पर्यटकों को नोकायन के दौरान विशेष सकून देती हैं। लेकिन बदलते दौर में नैनी झील की गहराई कम होती जा रही है, साथ ही विभिन्न स्त्रोतों एवं नालों से बरसात के मौसम में पानी के संग्रहण में भी कमी आती जा रही है। इस तथ्य को जिलाधिकारी सविन बंसल ने गंभीरता से लिया है। उनके विशेष प्रयासों से इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल नैनी झील का तकनीकि तौर पर अध्ययन कर रहा है। आधुनिकतम यंत्रों के माध्यम से नैनी झील की गहराई विभिन्न स्थानों पर नापी जा रही है। इसके साथ ही झील की तलहटी में पड़े मलवे व अन्य पदार्थों का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है।
      जिलाधिकारी सविन बंसल ने वैज्ञानिकों के साथ नैनी झील में भ्रमण कर वैज्ञानिकों द्वारा नैनी झील में किए जा रहे तकनीकि कार्यों का मौका मुआयना किया और वैज्ञानिकों से बात भी की। श्री बंसल ने बताया कि वैज्ञानिकों का विशेष दल पहली बार नैनीताल पहुॅचा है। इस महत्वपूर्ण सर्वे कार्य के लिए इसरो द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने झील में भ्रमण कर सोनार सिस्टम के माध्यम से नैनी झील की गहराई की लगातार जीपीएस मानचित्रण किया गया। इस सर्वे में वैज्ञानिकों ने झील में मौजूद विघटित ठौस जैसे-ठौस अपशिष्ट, पीएच मान आदि का अध्ययन किया । वैज्ञानिकों को झील के कई हिस्सों में गन्दगी होने का संकेत मिला। झील के कई हिस्सों में गहराई ज्यादा व कई हिस्सों में कम पाई गई। इसके साथ ही झील के पानी की गुणवत्ता, अवसादन तथा सूचकांक का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। श्री बंसल ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिक बैथीमेट्री सर्वे कर, प्रशासन को झील के सम्बन्ध में रिपोर्ट आख्या प्रस्तुत करेंगे जिसे शासन को भेजा जाएगा तथा झील के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धनरशि अवमुक्त कराने के लिए  अनुश्रवण भी किया जाएगा।
       जिलाधिकारी बंसल ने बताया कि पाषाण देवी मन्दिर के समीप से मध्य तक क्षेत्रफल में झील की गहराई सर्वाधिक है। नैनी झील की औषत गहराई कम होना चिन्ता का विषय है। उन्होंने बताया कि अभी तक झील की विधिवत तकीनीकि मैपिंग न होने के कारण यह जानकारी नहीं है कि झील में कितना मलवा जमा है। उन्होंने बताया कि प्रोपर मैपिंग होने से यह जानकारी रहेगी किए झील में कितना मलवा समा रहा है। उसी के हिसाब से तकनीकी कार्यवाही भी की जायेंगी। उन्होंने कहा कि नैनी झील को रिचार्ज करने वाले नालों की सफाई के साथ ही जाली लगाने का काम किया गया है। इसके साथ ही सूखाताल झील के पानी से बरसात में नैनी झील रिचार्ज होती है, के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। सूखाताल में गड्डे बनाए जायेंगे ताकि बरसात का पानी जमा हो और नैनी झील रिचार्ज होती रहे। इसके साथ ही सूखाताल व उसके आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि वृक्षों के माध्यम से भी वर्षा जल सूखाताल में संकलित हो सके। नैनी झील के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रशासनिक स्तर पर गंभीर एवं ठौस प्रयास किए जायेंगे। निरीक्षण के दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वैभव गर्ग, वैज्ञानिक पंकज, इंजीनियर नमन, अभिषेक, ईशान, उप जिलाधिकारी विनोद कुमार, पुलिस उपाधीक्षक विजय थापा आदि मौजूद थे।

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