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उत्तराखंड की लोककला ऐपण के संरक्षण व संवर्धन को साझे प्रयासों की जरूरत

देहरादून। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की बेटी मनोरमा सुयाल मुक्ति देश भर में बिखरे ऐपण कलाकारों को एक जुट कर उनकी प्रतिभा को सामने लाने का काम कर रही हैं। ऑनलाइन माध्यम से ऐसे कलाकारों के साथ पाक्षिक बैठक कर साझा प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। अर्थ सोसाइटी के नवोन्मेषी प्रोजेक्ट के तहत ऐपण वाइब्स ग्रुप के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक कला के संवर्धन,संरक्षण और आजीविका के साथ उत्तराखण्ड की पहचान बनाने के लिए काम किया जाएगा। यह मीटिंग आनलाइन गूगल मीट ऐप द्वारा की गई जिसमें पिथौरागढ़ से कविता खड़ायत, नैनीताल से दीपिका बिष्ट व दिप्ती बोरा,खटीमा से गीतिका नेगी हरियाणा से लता बिष्ट , चंडीगढ़  से हर्षिता बिष्ट, बागेश्वर से नीमा कोरंगा हल्द्वानी से वंदना जोशी दिल्ली से रितु रावत, गुड़गाव से यामिनी पांडे, हरिद्वार से संजीवनी कांडपाल, अल्मोड़ा से इन्द्रा अधिकारी, पंजाब से कमला करायत,देहरादून से उमा रावत ने विचार प्रकट किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अर्थ सोसाइटी के मुख्य सलाहकार हेमचन्द्र बहुगुणा रहे और कार्यक्रम का संचालन मनोरमा सुयाल द्वारा किया गया।
ग्रामीण एवम शहरी गृहणियों को साथ लेकर उनकी छिपी प्रतिभा को आजीविका का माध्यम बनाने के साथ साथ उत्तराखण्ड के परम्परागत ज्ञान और विलुप्त होती परम्पराओं  का डाक्यूमेंटशन किया जाएगा। ऐपण वाइब्स के माध्यम से नई पीढ़ी को परंपरागत ज्ञान से रूबरू करवाने के लिए नियमित प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी  साथ ही जनजातीय समाजों के परम्परागत ज्ञान पर विकासात्मक शोध पर पर संस्था द्वारा प्रयास किये जायेंगे।

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