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राज्यपाल शासन लगने के बावजूद महबूबा मुफ्ती सरकार के दौरान लिये गये फैसलों पर पुनर्विचार नहीं होगा

नई दिल्ली। राज्यपाल शासन लगने के बावजूद महबूबा मुफ्ती सरकार के दौरान पत्थरबाजों को माफी देने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा। गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार महबूबा सरकार के दौरान आम जनता का दिल जीतने के लिए जो फैसले हुए थे वह यथावत जारी रहेंगे। ध्यान देने की बात है कि पीडीपी से समर्थन वापसी के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने पत्थरबाजों के माफी के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी की थी।

आम जनता का भरोसा जीतने की कोशिशें भी रहेगी जारी  गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महबूबा मुफ्ती की सरकार के दौरान आम जनता के बीच सही संदेश देने के लिए कई फैसले लिए गए। इनमें पत्थरबाजों को माफी देने से लेकर रमजान के महीने के दौरान आतंकियों के खिलाफ आपरेशन बंद करने तक का फैसला शामिल है। इन फैसलों को अब वापस लेना न तो संभव है और न ही उचित होगा। उनके अनुसार राज्यपाल शासन लगने के बाद भी आम जनता के बीच पहुंच बनाने का काम जारी रहेगा।  गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा अब भी विभिन्न वर्गो से मुलाकात कर बातचीत से समस्या से समाधान का रास्ता तलाशने में जुटे हैं। ऐसे में पत्थरबाजों के खिलाफ वापस लिए केस को दोबारा शुरू करने का सवाल नहीं उठता है। लेकिन वैसे फैसले वापस हो सकते हैं सेना के मनोबल को तोड़ते हैं। मेजर गोगोई के खिलाफ एफआइआर जैसे फैसले इसमें शामिल हैं गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार राज्यपाल शासन के दौरान सिर्फ आतंकियों से निपटने के तरीके में अंतर आ जाएगा और सुरक्षा बलों को उनके खिलाफ कार्रवाई की पूरी छूट होगी। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की छूट सुरक्षा बलों को पहले भी थी, लेकिन उन्हें पत्थरबाजों के खिलाफ कार्रवाई में संयम बरतने का निर्देश था। इसी कारण कई खूंखार आतंकी बचकर भाग निकलते थे। अब सुरक्षा बल पत्थरबाजों से भी कड़ाई से निपटेंगे। जाहिर है पत्थरबाजों के खिलाफ सख्ती होने से आतंकियों का सुरक्षा कवच एक तरह खत्म हो जाएगा।

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