Uttarakhand

आज भी मौजूद है महाभारत काल का पीपल का वृक्ष

देहरादून। आज शिमला रोड़ नया गांव पेलियो के पास एस0डी0 न्यूज से मैं बालेश गुप्ता अपने सहयोगी कैमरामेन के साथ मनसादेवी मंदिर पहुंचा, जहां एक लगभग पांच हजार साल पुराना पीपल का पेड़ है जो कि अब काफी बुढ़ा होने के कारण जगह जगह से खंडित भी हो गया है। इस पीपल के वृक्ष की खासीयत यह थी कि आज से दो तीन वर्ष पूर्व तक इसका व्यास अर्थात गोलाई एक कमरे के बराबर फैली हुई थी और इस वृक्ष के अंदर पांच सात लोग बड़े आराम से विश्राम कर सकते थे, मंदिर के पुजारी का कहना है कि इस वृक्ष में एक रात के लिये पांडव भी यहां आकर रूके थे। इस पीपल के वृक्ष की आठ बड़ी भुजाएं थी जो कि जो कि मंदिर परिसर के अंदर जहां यह वृक्ष है वहां से पुलिस चैकी जो कि लगभग 80 से 120 फिट की दूरी पर है वहां तक उनकी लम्बाई थी तथा इस वृक्ष की जटाओं से मां भगवती व हनुमानजी की आकृति वाली मूर्ति बनी हुई थी लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया यह वृक्ष भी बुढ़ा होता गया और इसकी शाखायंे भी स्वयं टूट कर गिरती गयीं जिस कारण वह जटाओं से बनी मूर्तियां भी खंडित हो गयीं। आज इस पीपल के वृक्ष का थोड़ा सा ही हिस्सा बचा है जो कि अपनी विशालता को प्रमाणित करता है।
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