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मदिरा प्रेमियों को लूट रहे हैं सरकारी मदिरा दुकानों के कर्मचारी

सुदिप्तो चटर्जी : रायपुर के पुराने बस स्टैंड के विपरीत सरकारी दुकान का आज का नजारा जहाँ गोआ ब्रांड एक पाव की कीमत 80 रुपए है वहीं 70 रुपए में जम्मू ब्रांड बिक रहा है। इस सस्ते शराब के चलते लोग एक दूसरे के ऊपर से झूमाझटकी कर शराब खरीदने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं। वहीं पंडरी स्थित दूसरे शराब दुकान में मदिरा प्रेमियों ने आरोप लगाया कि इस सरकारी दुकान में रात 9:30 बजे के बाद शराब ज्यादा कीमत पर बेचे जाते हैं, पूछने पर गाली देते हैं और भगा देते हैं। शराब प्रेमियों का यह भी कहना है कि सरकार यदि ठेका बन्द कर दे तो वे शराब पीना छोड़ देंगे।

पंडरी स्थित सरकारी शराब दुकान में शराब का एक रेट और दूसरी ओर पुराने बस स्टैंड के विपरीत सरकारी शराब दुकान में अलग रेट। सरकारी शराब दुकान में शराब के रेट में फर्क क्यों ? ठेका तो प्राइवेट ठेकेदारों के हाथ मे अब नहीं है फिर रुपए 10 से लेकर 50 रुपए तक के अधिक पैसे किस लिए जा रहे हैं ? साथ ही यह अधिक वसूली किसके जेब में जा रहा है? इसकी जांच आबकारी विभाग को त्वरित करना चाहिए। क्या दुकानों का संचालन करने वाले अधिक कीमत में शराब बेचकर अपना जेब भरते हैं या इसका किसी तरह के बंटवारे से संबंध है ? मदिरा प्रेमियों का यह भी आरोप है कि इस भीड़ में असमाजिक तत्त्व के कुछ लोग जेब साफ भी कर रहे हैं। क्या यही छत्तीसगढ़ का असली स्वरूप है या स्वरूप बदल रहा है ?

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