Uttarakhand

दुआयें वहाँ मिलती हैं जहाँ सन्तुष्टता होतीः ब्रह्मकुमारी मन्जू  

देहरादून। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र सुभाषनगर में आयोजित सत्संग में राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी मन्जु बहन ने ”दुआयें लेना और दुआयें देना” विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि दुआयें वहाँ मिलती हैं जहाँ सन्तुष्टता है। इसलिए सदा सन्तुष्ट रहना है और सबको सन्तुष्ट करना है। अगर कोई दुख दे भी तो भी दुख देने वाले को दुआयें देनी हैं।
उन्होंने कहा कि सहन करना भी पड़े तो समाने की शक्ति द्वारा सहनशीलता का गुण धारण कर सबको दुआयें देनी हैं और दुआयें लेनी भी हैं। दुख देने वाले को दुआयें देनी या लेनी मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं हैं। राजयोग के अभ्यास से हमारे में स्वतः ही शक्ति व सहनशीलता के गुण आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि दुआयें लेना और दुआयें देना यह बीज है जिसमें सन्तुष्टता का पौधा समाया हुआ है। इस पौधे से क्षमा और रहम का फल निकलता है। शिव भगवानुवाच जो व्यक्ति देही अभिमानी स्थिति में स्थित रह कर कर्म करते हैं वे स्वयं भी सन्तुष्ट रहते हैं और दूसरों को भी सन्तुष्ट करते हैं। उन्हें सन्तुष्टमणि का वरदान स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। कार्यक्रम में मनजीत, माला, प्रीति, कमला, सुशीला, वीरेन्द्र, मोहित, अशोक, राजेन्द्र, राजकुमार, किरण आदि उपस्थित रहे।

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