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डीआईटी विवि में जैवविविधता पर हुआ मंथन

देहरादून। डीआईटी विशवविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं रसायन विभाग द्वारा अंर्तराष्ट्रीय जैवविधता दिवस का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विवि के कुलपति एन रविशंकर ने किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पदम भूषण एवं पदम डॉ. अनिल जोशी ने जैवविविधता के संरक्षण पर अपने विचार रखे और उन्होंने बताया कि हमने अपने  जीवन को दो पहलुओं में बांट दिया है। पहला हमारी सोच में सामूहिकता नहीं है और हमने हवा, मिटटी और पानी से अलग कुछ नहीं सोचा। दूसरा भोगवादी सभ्यता को बढ़ावा देना जिसमें पृथ्वी को हमने सुखों का साधन बना लिया है और अपने विकास को केवल जीवन को सुंदर बनाना मान लिया है। उन्होंने कहा कि बेहतर जीवन को हमने केवल पृथ्वी के साधनों का उपयोग माना है और इसी का यह कारण है कि आज हमने सबसे बड़ी चोट खाई है। जैवविविधता को बचाने में हम सभी को जुटना होगा।
डॉ. कपिल जोशी जो विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित ने बताया कि जंगल की आग जैवविविधता को बचाने के लिए बाधक साबित हो रही है। हमारे यहां 46 हजार पुष्प विवदता एवं 21 हजार प्रजातियां जैवविविधता की है। डॉ. कपिल जोशी ने जंगल की विविधता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अगर हम चीड़, पाईन, नीडल को व्यवसायिक उपयोग करने के लिए सेंटर बनाऐंगे तो शायद हम जैवविधता को बचा सकते है। डॉ. जोशी ने बताया कि पूरे विशव में भारत के अंदर 12 विषाल जैव विविधता केंद्र है जो अपने आप में एक नई  पहचान है। इस समय डा कपिल जोशी अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के रूप में कार्यरत है। वइल्ड लाईफ इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया देहरादून में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. रूचि बडोला ने बताया कि हमें जैवविधता को बचाने के लिए लीगल फ्रेम वर्क तैयार करना होगा। कार्यक्रम का संचालन विवि के चीफ प्रोक्टर डॉ.  नवीन सिंघल ने किया। कार्यक्रम में डॉ. वीके सिंह डॉ.  संजय गर्ग, डॉ.  आरती चतुर्वेदी, डॉ. जबरिंदर सिंह, डॉ. सुशील पोरवाल डॉ.  मनीशा डॉ.  मनोज भटनागर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 112 छात्रों एवं फैकल्टिी ने प्रतिभाग किया।

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