विदुषी ‘निशंक’ की अपनी माताजी कुसुमकांता की जयंती पर अनूठी श्रद्धांजलि

देहरादून। कुसुम कांता फाउंडेशन एवं कृषि उद्योग विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में लेखक गांव, थानो में
कुसुम कांता जी की जयंती के अवसर पर महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार एवं सामाजिक सरोकारों को समर्पित एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सिंधवाल और थानो क्षेत्र की 100 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को निःशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की गईं, ताकि वे अपने कौशल को रोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम का शुभारंभ रश्मि सुन्दरियाल नौडियाल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात स्वर्गीय कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन मूल्यों, संवेदनशीलता और समाजसेवा के प्रति समर्पण को याद किया गया।
कुसुम कांता फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्गीय कुसुम कांता जी का जीवन सेवा, करुणा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है जब उसके सपनों और मूल्यों को समाज के बीच जीवित रखा जाए। उन्होंने महिलाओं से संवाद करते हुए कहा कि आज वितरित की जा रही सिलाई मशीनें केवल मशीनें नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और नए सपनों की उड़ान का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम लेखक गांव में उपस्थित प्रत्येक महिला इस परिवार का हिस्सा है।
फाउंडेशन की प्रोग्राम निदेशक शिवानी गुप्ता ने बताया कि कुसुम कांता फाउंडेशन महिला सशक्तीकरण और बाल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। संस्था द्वारा सिलाई प्रशिक्षण केंद्र, कंप्यूटर कोर्स, ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण सहित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मेधावी विद्यार्थियों को पांच लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान करने की भी योजना है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों के सपनों को नई दिशा मिल सके।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने मांगल गीत देणा होया खोली का गणेशा की प्रस्तुति के साथ अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कुसुम कांता उनकी प्रिय छात्राओं में से एक थीं और उन्हें कोटद्वार में पढ़ाने का अवसर मिला था। उन्होंने बताया कि कुसुम कांता जी गढ़वाली लोक संस्कृति और लोकगीतों से गहरा जुड़ाव रखती थीं। डॉ. बड़थ्वाल ने उनसे जुड़े अनेक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में संवेदनशीलता, सरलता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत समन्वय था।
अपने भावपूर्ण उद्बोधन में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री एडवोकेट आर्यन देव उनियाल ने स्वर्गीय कुसुम कांता जी को याद करते हुए कहा कि वे अत्यंत संवेदनशील और सृजनशील व्यक्तित्व की धनी थीं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी रचना केवल साहित्य नहीं होती, बल्कि वे संस्कार भी होते हैं जो वह समाज और परिवार को देता है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह पहल स्वर्गीय कुसुम कांता जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं थानो ग्राम प्रधान चंद्र प्रकाश तिवारी ने कहा कि फाउंडेशन की इस पहल से गांव की महिलाओं को वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने लेखक गांव और कुसुम कांता फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं तथा भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियां निरंतर आयोजित होनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सविता मोहन ने कहा कि कुसुम कांता उनकी छात्रा रही हैं और आज लेखक गांव के इस पावन प्रांगण में उन्हें याद करते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो अनेक कुसुम यहां उपस्थित हों। उन्होंने कहा कि एक मां सृजन का प्रतीक होती है और सृजन ही जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी बेटियां हमारे लिए कुसुम के समान हैं। उन्होंने सभी को लेखक गांव से जुड़ने और यहां एक पौधा लगाकर स्मृतियों और संस्कारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सिलाई मशीन प्राप्त करने वाली महिलाओं ने कुसुम कांता फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके लिए केवल एक उपहार नहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्वयं के पैरों पर खड़े होने का सुनहरा अवसर है। कार्यक्रम का संचालन मोनिका शर्मा द्वारा किया गया और संयोजन सनराइज एकेडमी की प्रबंध निदेशक पूजा पोखरियाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर सर्वेश उनियाल, कृषि उद्योग विकास परिषद की संगीता सिंह, रानीपोखरी मंडल अध्यक्ष गीतांजलि रावत, डॉ बेचैन कंडियाल, सिंधवाल गांव की ग्राम प्रधान तानिया सिंधवाल, डॉ अनिल शर्मा, डॉ प्रदीप कोठियाल, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, ग्रामीण महिलाएं एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।




