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बेटियां शिक्षित होंगी तो अपने स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति सचेत रहेंगीः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। कोविड-19 महामारी के इस दौर में पूरी दुनिया अनिश्चितता और भय से गुजर रही है। इस समय पूरे विश्व की स्वास्थ्य सेवायें कोविड-19 महामारी से बढ़ रही जोखिमों को कम करने हेतु सेवारत हैं। ऐसे में सभी राष्ट्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ प्रभावित हो रही हैं क्योंकि पूरा विश्व कोरोना वायरस का सामना कर रहा है। आज का दिन महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड के इस दौर में प्रसव, प्रसवपूर्व और प्रसव के पश्चात देखभाल और अन्य महत्वपूर्ण सेवायें प्रभावित हो रही है तथा इससे  सम्बंधित सुविधाओं तक महिलाओं की पहुंच में भी अन्तर आया है। कोविड-19 के कारण तनाव बढ रहा है, जिससे लिंग आधारित हिंसा और शोषण में भी वृद्धि हो रही है।
इस महामारी के दौर में जो जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसे आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक महिलाओं और लड़कियों की पहुुंच भी कम हुई है, इसलिये प्रसव से पूर्व और प्रसव के पश्चात होने वाली देखभाल विशेष रूप से प्रभावित हो रही है। जिसके कारण समाज के सबसे कमजोर लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं। अतः उन तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिये हमें एकजुटता के साथ खड़े होने की जरूरत है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, लैंगिक समानता और मौलिक सुविधाओं तक सभी की पहंुच सुनिश्चित करने हेतु इस समय सभी को एकजुट होने की आवश्यकता है। प्रसूति नालव्रण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु इस दिशा में अभी और कार्य करने की जरूरत है। महिलाओं और लड़कियों को उनके स्वास्थ्य के विषय में जानकारी देना बहुत आवश्यक है और उससे भी जरूरी है उन्हें शिक्षित करना। बेटियां शिक्षित होगी तो वे अपने स्वास्थ्य और अधिकारों दोनों के प्रति सचेत रहेगी। दूसरी बात बेटियों को स्वस्थ रखने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु समाज में हो रहे बाल विवाह पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना होगा। समाज में आज भी बेटियों की जल्दी शादी कर दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनोें प्रभावित होते हैं। कम उम्र में ही उन पर काम का और परिवार का अधिक बोझ आ जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य की देखभाल ठीक से नहीं हो पाती।
अक्सर देखने में आया है कि कई स्थानों पर प्रसव घर पर ही कराया जाता है ऐसे में जब एक महिला को लंबे समय तक प्रसव पीड़ा झेलनी पड़ती है तो इसका असर माता और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। आज भी समाज में ऐसी कई प्रथायें प्रचलित हैं जिसका सीधा असर महिलाओं और बेटियों के स्वस्थ्य पर होता है।
स्वामी जी ने कहा कि अभी कोविड-19 के इस दौर में अस्पतालों के वातावरण और संसाधनों में भी बदलाव आया है। साथ ही दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों की उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच नहीं होती। जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का ठीक तरह से समाधान नहीं हो पाता।

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