डालनवाला क्षेत्र में हुई हत्या की घटना का एसटीएफ और दून पुलिस की संयुक्त टीम ने किया खुलासा

देहरादून। डालनवाला क्षेत्र में हुई हत्या की घटना का एसटीएफ और दून पुलिस की संयुक्त टीम ने खुलासा किया है।
घटना की साजिश में शामिल दो अभियुक्तों को पुलिस ने अलग-अलग प्रांतों से गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों द्वारा कई माह पूर्व ही विक्रम शर्मा को मारने की योजना बनाई गयी थी। जमशेदपुर तथा नोएडा में विक्रम शर्मा को ठिकाने लगाने की तैयारी थी, पर विक्रम के साथ ज्यादा लोगों के चलने के कारण योजना को अजांम नहीं दे पाये थे। घटना से लगभग तीन माह पूर्व साजिश में शामिल एक अभियुक्त ने उसी जिम को ज्वाइन किया था, जिसमें विक्रम शर्मा जाता था। घटना के दिन भी अभियुक्त द्वारा ही अपने अन्य साथियों को फोन के माध्यम से विक्रम शर्मा के जिम में होने की जानकारी दी थी। घटना के बाद भागने के लिये अभियुक्तों द्वारा हरिद्वार से रेंट पर स्कूटी तथा बाइक का इस्तेमाल किया गया था। घटना में वांछित अभियुक्तों पर एसएसपी देहरादून द्वारा 25-25 हजार का ईनाम घोषित किया गया था।
13 फरवरी को कंट्रोल रूम के माध्यम से कोतवाली डालनवाला को सूचना प्राप्त हुई कि सिल्वरसिटी माल में कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी है, प्राप्त सूचना पर थाना डालनवाला से पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा तथा शव को कब्जे में लिया गया। मृतक व्यक्ति की पहचान विक्रम शर्मा पुत्र अमृतपाल शर्मा निवासीः अमनविहार रायपुर के रूप में हुई। घटना की सूचना पर पुलिस महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र, एसएसपी देहरादून तथा एसएसपी एसटीएफ द्वारा भी मौके पर जाकर उपस्थित अधिकारियों से घटना के समबन्ध में जानकारी प्राप्त की गई तथा मौके पर फारेन्सिक टीम को बुलाकर घटना स्थल की फोटोग्राफी वीडियोग्राफी करते हुए आवश्यक साक्ष्य संकलन की कार्यवाही की गई।
मृतक विक्रम शर्मा के सम्बन्ध में जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि मृतक आपराधिक पृष्ठभूमि से जुडा था, जो झारखण्ड का कुख्यात अपराधी भी था तथा अपने साथियो के साथ झारखण्ड के कई नामी व्यक्तियों की हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी जैसे प्रकरणों में शामिल रहा था तथा उस पर कई आपराधिक घटनाओं के अभियोग भी पंजीकृत थे, जिनमें वह जमानत पर चल रहा था। जांच के दौरान मृतक विक्रम शर्मा को 08 वर्ष पूर्व जमशेदपुर पुलिस द्वारा झारखण्ड में हुई एक हत्या के प्रकरण में देहरादून से गिरफ्तार किये जाने की जानकारी भी प्राप्त हुई। घटना के सम्बन्ध में मृतक के परिचित अखिलेश सिंह द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर कोतवाली डालनवाला पर अज्ञात अभियुक्तों के विरूद्ध सम्बन्धित धाराओं में हत्या का अभियोग पंजीकृत किया गया।
मृतक के झारखण्ड में आपराधिक पृष्ठभूमि से जुडे होने के कारण घटना में झारखण्ड के किसी गिरोह के शामिल होने की सम्भावना के दृष्टिगत पुलिस द्वारा घटना के सभी सम्भावित पहलुओं पर गहन विवेचना प्रारम्भ की गई, साथ ही एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर घटना के अनावरण हेतु अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों द्वारा घटना स्थल व उसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेजों का अवलोकन किया गया, साथ ही सर्विलांस के माध्यम से भी घटना में शामिल अभियुक्तों के सम्बन्ध में जानकारी एकत्रित की गई। सीसीटीवी फुटेजों के अवलोकन से पुलिस टीम को मोटर साइकिल सवार 03 अभियुक्तों द्वारा घटना को अंजाम दिया जाना तथा उसके उपरान्त घटना में प्रयुक्त मोटर साइकिल को सहस्त्रधारा क्षेत्र में खडा कर वहां पूर्व से खडी की गई मोटर साइकिल व स्कूटी से हरिद्वार की ओर जाना प्रकाश में आया।
पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त अपाचे मोटर साइकिल को सहस्त्रधारा रोड से बरामद किया गया, जिसका जितेन्द्र कुमार साहु पुत्र मुन्ना साहु निवासीः पूर्वी सिंहभूम झारखण्ड के नाम पर पंजीकृत होना प्रकाश में आया। अभियुक्तों के मोटर साइकिल व स्कूटी से हरिद्वार की ओर जाने की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम द्वारा तत्काल हरिद्वार पहुंचकर अभियुक्तों के सम्बन्ध में जानकारी जुटाई गई तो अभियुक्तों द्वारा घटना के बाद भागने में इस्तेमाल की गई उक्त मोटर साइकिल व स्कूटी को उनके द्वारा हरिद्वार में अलग-अलग स्थानों से आकाश कुमार प्रसाद पुत्र अरूण प्रसाद निवासीः बागबेडा जमशेदपुर झारखण्ड की आई0डी0 पर लिया जाना तथा राजकुमार, पुत्र शिवदत्त निवासीः गाराबास बाग बेड़ा जमशेदपुर झारखण्ड की यू0पी0आई0 आईडी से उसका भुगतान किया जाना प्रकाश में आया, साथ ही तीनों अभियुक्तों के हरिद्वार से एक काली रंग के स्कार्पियो वाहन संख्याः जेएच-05-डीजेड-5517 से भागने की जानकारी प्राप्त हुई।
वाहन के सम्बन्ध में जानकारी करने पर उक्त वाहन का जमशेदपुर में सारिका इन्टरप्राइजेज के प्रापराईटर यशराज के नाम पर पंजीकृत होना ज्ञात हुआ, जिस पर तत्काल एक टीम को जमशेदपुर रवाना किया गया, जहां टीम द्वारा प्रकाश में आये अभियुक्त राजकुमार, पुत्र शिवदत्त निवासीः गाराबास बाग बेड़ा जमशेदपुर झारखण्ड के सम्बन्ध में जानकारी एकत्रित करते हुए दिनाँक 19-02-26 को उसे जमशेदपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त राजकुमार से प्रारम्भिक पूछताछ में उक्त संदिग्ध स्कार्पियो वाहन के स्वामी यशराज का अभियुक्त राजकुमार का पुत्र होना तथा उक्त वाहन को अभियुक्त यशराज के परिचित आशुतोष व उसके अन्य साथियों द्वारा ले जाने की जानकारी प्राप्त हुई, जिस पर प्रकाश मे आये अभियुक्तों आशुतोष व उसके अन्य साथियों के सम्बन्ध में पुलिस टीम द्वारा सर्विलांस व अन्य माध्यमों से जानकारी एकत्रित की गई। साथ ही आने-जाने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से संदिग्ध वाहन की तलाश की गई तथा आज दिनांकः 23-02-26 की प्रातः पुलिस टीम द्वारा घटना में प्रयुक्त स्कार्पियो वाहन को ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में एल्फा-2 अपार्टमेंट से मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर पुत्र प्रभास ठाकुर निवासीः एमई स्कूल रोड, बाबा बरूदा अपार्टमेंट, फ्लैट नम्बर बी-8 जुगसलाई, जमशेदपुर झारखण्ड के कब्जे से बरामद किया गया तथा संदिग्धता के आधार पर अभियुक्त मोहित उर्फ अक्षत को हिरासत में लेते हुए पूछताछ हेतु देहरादून लाया गया, जहां अभियुक्त से पूछताछ के दौरान अभियुक्त आशुतोष के साथ उसके साथी अंकित वर्मा, विशाल सिंह, आकाश तथा अन्य के द्वारा उक्त घटना को अंजाम दिया जाना प्रकाश में आया तथा घटना में अभियुक्त मोहित की संलिप्तता भी पाये जाने पर उसे गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में अभियुक्त मोहित उर्फ अक्षत द्वारा बताया गया कि वह नोएडा स्थित एक निजि यूनिवर्सिटी में बीबीए प्रथम वर्ष का छात्र है तथा वर्तमान में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में एल्फा – 2 अपार्टमेंट में अपने 02 अन्य साथियों के साथ रह रहा है। कुछ वर्ष पूर्व उसके मामा विकास महतो द्वारा उसकी मुलाकात आशुतोष पुत्र उपेन्द्र सिंह से कराई गई थी तथा आशुतोष के माध्यम से लगभग 04 वर्ष पहले वह विशाल सिंह तथा अंकित से मिला था। लगभग 02 वर्ष पूर्व टाटा नगर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में एक व्यक्ति पर हुए जानलेवा हमले की घटना में आशुतोष जेल गया था तथा कुछ समय बाद अमन सिंह के कहने पर विशाल द्वारा अमरनाथ नाम के एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी, जिसमें विशाल जेल चला गया था। जेल में विशाल का विक्रम शर्मा के एक करीबी से विवाद हो गया था, जिसके चलते विक्रम शर्मा द्वारा जेल में बंद अपने गुर्गों के माध्यम से विशाल को काफी परेशान किया गया था। इस सम्बन्ध में विशाल द्वारा जेल से बाहर आने के बाद आशुतोष को बताया गया । अभियुक्त आशुतोष पूर्व में भी आपराधिक घटनाओ में जेल गया था तथा अपराध की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहता था, चूंकि विक्रम शर्मा का अपराध की दुनिया में काफी वर्चस्व था तथा उसकी हत्या कर अभियुक्त अपराध की दुनिया में अपनी धाक जमा सकता था, जिसके चलते उसके द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर विक्रम शर्मा की हत्या की योजना बनाई गई।
अभियुक्त आशुतोष, सारिका इन्टरप्राइजेज के मालिक यशराज का परिचित था तथा उसे जानकारी थी कि यशराज भी विक्रम शर्मा से काफी परेशान चल रहा है, क्योंकि यशराज की कम्पनी सारिका इन्टरप्राइजेज का रेलवे में फूड सप्लाई का कान्ट्रैक्ट था तथा विक्रम शर्मा भी उक्त कान्ट्रैक्ट को हासिल करना चाहता था तथा उसके द्वारा पूर्व में भी यशराज से रंगदारी की डिमांड की गई थी, जिसके चलते आशुतोष द्वारा अपनी इस योजना के सम्बन्ध में यशराज को बताया गया तथा यशराज द्वारा भी विक्रम शर्मा की हत्या में उसे सहयोग करने की बात कही गई। अभियुक्त विक्रम शर्मा को जमशेदपुर में ही मारना चाहते थे, पर जमशेदपुर में विक्रम शर्मा के साथ हर समय काफी लोगों के रहने के कारण वो अपनी योजना को अंजाम नहीं दे पाये। जिसके बाद अभियुक्तों को विक्रम शर्मा के नोएडा में भी आने-जाने की जानकारी मिली, जिस पर अपनी योजना को अंजाम देने के लिये अभियुक्तों द्वारा नोएडा में अंकित वर्मा के नाम से एक फ्लैट किराये पर लिया पर नोएडा में भी मौका न मिलने पर उनके द्वारा देहरादून में विक्रम की हत्या की योजना बनाई तथा उसकी दिनचर्या की जानकारी के लिये अंकित वर्मा द्वारा उसी जिम को ज्वाईन कर लिया गया, जहां विक्रम शर्मा रोज जाया करता था। घटना के दिन भी अंकित वर्मा द्वारा ही आशुतोष को फोन कर विक्रम शर्मा के जिम में होने की जानकारी दी थी तथा आशुतोष तथा विशाल द्वारा जिम से बाहर आते समय विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद आशुतोष, विशाल अपने एक अन्य साथी आकाश के साथ पहले हरिद्वार से रेंट पर ली गई बाइक व स्कूटी से हरिद्वार पहुँचे तथा उक्त स्कूटी व बाइक को वापस कर पहले से ही हरिद्वार में खडी की गई यशराज की स्कार्पियो से घटना के दिन ही नोएडा स्थित मोहित के फ्लैट में पहुंचे। मोहित के घटना के दिन देहरादून में होने के कारण उनके द्वारा उससे फोन पर सम्पर्क कर स्कार्पियों वाहन को पार्किंग में खडा करवाने की बात कही गई। अगले दिन मोहित के वापस नोएडा पहुंचने पर अभियुक्तों द्वारा उसे देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या करने की बात बताते हुए स्कार्पियो वाहन को उसी के पास छोड दिया तथा वहां से अलग-अलग स्थानों को चले गये, इस दौरान अभियुक्तों के रूकने तथा उनके खाने-पीने की पूरी व्यवस्था मोहित उर्फ अक्षत द्वारा की गई थी।




