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पंतनगर में 120वाँ अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ

देहरादून/पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, निदेशक शोध डॉ. एस. के. वर्मा एवं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा उपस्थित रहे। मेले के उद्घाटन के पश्चात विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को विभिन्न महाविद्यालयों, नवाचार आधारित स्टॉल और स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाये गये विभिन्न उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन कराया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर कहा कि 21वीं सदी की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को किसान के खेत तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित मारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और देश को कृषि उत्पादकता के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। राज्यपाल ने पंतनगर विश्वविद्यालय की इस भूमि को नमन करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी जंगलों और वन्यजीवों से कृषि क्षेत्र में परिवर्तित किया गया, उसमें किसानों और पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन के लिए उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस क्षेत्र को कृषि की भूमि बनाया।
राज्यपाल ने कहा कि 120वें किसान मेले के पीछे 119 आयोजनों का अनुभव और समृद्ध परंपरा जुड़ी हुई है। उन्होंने मेले में किसानों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों की व्यापक भागीदारी को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह आयोजन वैज्ञानिक, किसान, युवा, उद्यमिता और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्यपाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय कृषि के माध्यम से ‘फूड सरप्लस’ के बाद ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में कार्य करे।
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में तीन प्रमुख क्रांतियों की आवश्यकता बताते हुए हनी क्रांति, अरोमा क्राति और श्रीअन्न (मिलेट्स) क्रांति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्राकृतिक शहद, सुगंधित एवं औषधीय फसलों तथा मिलेट्स के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं है और राज्य इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आहवान किया।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीक से दूरी बनाने के बजाय किसानों को उसके साथ मित्रता करनी चाहिए। उन्होंने हनुमान जी की विशाल सोच और भगवान गणेश के गुणों का उदाहरण देते हुए किसानों को बड़ी सोच के साथ कृषि में परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को मजबूत करना होगा। वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध का वास्तविक लाभ तब है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर किसान के खेत तक पहुंचे। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को स्थानीय कृषि समस्याओं के समाधान का केंद्र बनाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तमी सुनिश्चित होगा, जब वैज्ञानिक तकनीक और शोध किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने ‘लैब टू लैंड’ की भावना को मजबूत करने तथा कृषि वैज्ञानिकों के किसानों से नियमित संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में बागवानी, हाई डेंसिटी एप्पल, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मोटे अनाज जैसी फसलों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोदा-झंगोरा जैसे पारंपरिक अनाजों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसानों के लिए नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सार्थक माना जाएगा, जब विकसित तकनीक एवं उसके परिणाम किसानों के खेत तक पहुंचें और उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। प्रारम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा द्वारा बताया गया कि मेले में 560 से अधिक स्टॉल लगे हैं और इस वर्ष 40 से 50 हजार कृषकों की मेले में आने की संभावना है। लगाये गये स्टॉलों में कृषि यंत्र, जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्प एवं सब्जी की नवीन प्रजातियाँ, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली, तथा स्मार्ट कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा घरेलू उत्पादों जैसे जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बडियों, तथा हस्तशिल्प सामग्रियों का प्रदर्शन किया गया है।  अंत में निदेशक शोध डॉ. एस.के. वर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्यों का विमोचन किया गया तथा उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से चयनित 9 प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित किया गया। गांधी हाल में वीसीएसजी उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार, पौढ़ी गढ़वाल के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, जिला प्रशासन के अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अधिष्ठाता, निदेशकगण, संकाय सदस्य, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी एवं विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधि ने प्रतिभाग किया।

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