प्रतिस्पर्धा नहीं, पूरकता ही चिकित्सा का मूल सिद्धांतः डॉ. बी.के.एस. संजय

देहरादून। संजय ऑर्थोपीडिक स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर तथा सेवा सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में रोल ऑफ फिजियोथेरेपी इन फिजिकल हेल्थ विषय पर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने फिजियोथेरेपी की बढ़ती भूमिका और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि कोई भी चिकित्सा पद्धति दूसरी चिकित्सा पद्धति की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सभी एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और फिजियोथेरेपिस्टों को सहयोग और समन्वय की भावना से कार्य करना चाहिए। एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष डॉ. ने संजय बौद्ध दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसी सोच होती है, वैसा ही व्यक्तित्व बनता है। उन्होंने कहा कि रोगी के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए सभी चिकित्सा प्रणालियों का सम्मान करना चाहिए और किसी भी पद्धति के प्रति नकारात्मक धारणा नहीं बनानी चाहिए।
ऑर्थोपीडिक सर्जन, उत्तराखंड ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एस. एन. सिंह ने कहा कि प्रत्येक फिजियोथेरेपिस्ट को यह जानकारी होनी चाहिए कि किन परिस्थितियों में फिजियोथेरेपी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चोट लगने के बाद पहले दिन से ही आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी शुरू कर देनी चाहिए, जिससे मरीज को शीघ्र लाभ मिल सके। विशिष्ट वक्ता एवं स्पाइन सर्जन डॉ. गौरव संजय ने कहा कि फ्रैक्चर, नर्व इंजरी और पैरालिसिस जैसे मामलों में शुरुआती फिजियोथेरेपी मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि समय पर ऑपरेशन, सही पुनर्वास और नियमित फिजियोथेरेपी से मरीज की कार्यक्षमता काफी हद तक वापस लाई जा सकती है। उन्होंने मरीजों को उपचार और रिकवरी की संभावित अवधि के बारे में पहले से जानकारी देने की भी सलाह दी। सेमिनार में बड़ी संख्या में फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।



