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13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में कितने लोग शहीद हुए इसका विवरण आज तक सरकार व प्रशासन जुटा नहीं पाया

अमृतसर। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में कितने लोग शहीद हुए, इसका विवरण आज तक सरकार व प्रशासन जुटा नहीं पाया। यही कारण है कि सूचना का अधिकार एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी 100 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं मिली। वहीं हर साल 13 अप्रैल को सरकारी अधिकारी व नेता जलियांवाला बाग में मौन खड़े होकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। उन शहीदों को जिन्हें न तो सरकारी कागजों में शहीद का दर्जा मिला और न ही यह मालूम हो पाया कि कितनों ने शहादत दी। सामाजिक कार्यकर्ता नरेश जौहर ने बताया कि उन्होंने 30 दिसंबर 2018 को जिला प्रशासन से सूचना अधिकार एक्ट के तहत जानकारी मांगी थी कि जलियांवाला बाग में जनरल डायर की बर्बरता में कितने भारतीयों को शहादत देनी पड़ी? इसको आज 100 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अधिकारी RTI का जवाब नहीं दे रहे हैं। जौहर के अनुसार 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग में मेला लगता है।

जितने लोग, उतनी रिपोर्ट  जलियांवाला बाग में गोलीकांड के तुरंत बाद लाहौर में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओडवायर को भेजी अपनी रिपोर्ट में जनरल डायर ने 200 से 300 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी, जबकि माइकल ओडवायर ने अपनी भेजी रिपोर्ट में मरने वालों की गिनती 200 बताई। होम मिनिस्ट्री (1919), नंबर-23, डीआर-2 में चीफ सचिव जेबी थाम्स और एचडी क्रेक ने 290 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी। वहीं मिलिट्री रिपोर्ट में कहा गया है कि जलियांवाला बाग में 200 से भी कम लोग मारे गए थे। आधिकारिक तौर पर 381 लोगों के मारे जाने व 1208 के जख्मी होने की पुष्टि की गई। हालांकि अमृतसर सेवा समिति ने जलियांवाला बाग में मरने वालों की संख्या 501 बताई।

शहीदों के नाम उचित जगह पर अंकित किए जाएं इतिहासकार सुरिंदर कोछड़ का कहना है कि शहीदों की उक्त सभी सूचियों में सब से बड़ी खामी यह है कि इनमें दर्ज नामों की गणना उक्त कांड के चार माह बाद यानी 20 अगस्त 1919 को शुरू की गई। यह जरूरी है कि सरकार जलियांवाला बाग के शहीदों को अज्ञात न रहने दे। शहीदों के नाम जलियांवाला बाग स्मारक में किसी उचित जगह पर सम्मानपूर्वक अंकित किए जाएं।

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