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नरोदा मामले में बरी माया कोडनानी

अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में भाजपा की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को 20 अप्रैल को बरी कर दिया। इस दंगे में भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी। अदालत ने हालांकि इस मामले में बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी की दोषसिद्धि को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति हर्षा देवानी और न्यायमूर्ति एएस सुपेहिया की खंडपीठ ने 16 साल पुराने इस मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोडनानी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके। बाबू बजरंगी, जिसकी दोषसिद्धि अदालत ने बरकरार रखी है, उसका नाम षडयंत्रकारियों में शामिल था।
विशेष अदालत ने अगस्त 2012 में माया कोडनानी सहित 32 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। माया को जहां 28 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई थी वहीं बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। निचली अदालत ने सात अन्य दोषियों को 31 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी वहीं 22 अन्य को 24 साल की सजा सुनाई थी। इस मामले में 29 लोगों को बरी कर दिया गया था। माया कोडनानी इस समय जमानत पर हैं जबकि बजरंगी जेल में है। यह घटना गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बों में हुए अग्निकांड के एक दिन बाद की है। इस घटना में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में 28 फरवरी 2002 को भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी।

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