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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने कहा कि आज उन आरोपियों के साथ जो हुआ है, अच्छा हुआ

नई दिल्ली । हैदराबाद सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के सभी आरोपितों के एनकाउंटर पर समाज के सभी वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है।  इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने कहा कि आज उन आरोपियों के साथ जो हुआ है, अच्छा हुआ है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद केस की पीड़िता के परिवार को न्याय मिला, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि जब तक केंद्र सरकार कठोर कानून नहीं बनाती है तब तक कुछ नहीं होगा। निर्भया के दोषी अभी भी सरकारी मेहमान है। दोषियों को हर हाल में छह माह में सजा मिलनी चाहिए।

    उधर, पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर भी इस पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर आरोपित पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस ने जो किया वह गलत नहीं कहा जा सकता। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम गंभीर ने कहा कि देश में न्यायिक प्रणाली को सुधारने की जरुरत है। अपराधियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए गंभीर ने कहा कि दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला अंतिम होना चाहिए। फांसी को रोकने के लिए कोई दया यायिका या अपील नहीं होनी चाहिए। हैदराबाद सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपितों की एनकाउंटर के मामले पर उन्होंने कहा कि अगर वे भागने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस ने सही कार्य किया। मैं पुलिस के साथ खड़ा हूं।

बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा पीड़िता को न्याय मिला  उधर, बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि हैदराबाद पुलिस ने मुठभेड़ में चारों दुष्कर्मी को मार गिराया, इससे पीड़िता को न्याय तो मिला है लेकिन हमें उम्मीद थी कि आपराधिक न्याय प्रणाली के माध्यम से न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति के साथ लोग धैर्य खो रहे है। इसे सुधारना होगा और दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सजा देनी होगी।

क्या है पूरा मामला 27-28 नवंबर की रात हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ चार लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार किया था। तेलंगाना पुलिस के अनुसार, पुलिस सभी आरोपितों को उस फ्लाइओवर के नीचे ले गई जहां पर आरोपितों ने पीड़िता को जिंदा जला दिया था। पुलिस पीड़िता की मोबाइल को तलाश कर रही थी और क्राइम सीन को रीक्रिएट किया जा रहा था। इसी दौरान आरोपितों ने दो पुलिसकर्मियों के हथियार छीन लिए और उन पर हमला कर दिया। सरेंडर करने की चेतावनी के बाद जब आरोपित नहीं माने तो पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और सभी मारे गए।इस घटना के बाद तेलंगाना पुलिस सवालों के घेरे में है। मानवाधिकार संगठन ने भी इसे गंभीरता से लिया है। जहां आम लोग पुलिस की तारीफ कर रहे हैं वहीं राजनीति से जुड़े लोग नपी-तुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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