उत्तरप्रदेश

दिवाली के अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव व कल्याण सिंह को दी बधाई

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को सपा संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को दीपावली की शुभकामना देने गए थे, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ निकाले गए। अयोध्या मुद्दे पर मुलायम और कल्याण दो धु्रव रहे हैं। राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले दोनों दिग्गजों से योगी की इस मुलाकात से सियासी हलचल बढ़ गई है।

जून में मुलायम का हाल जानने पहुंचे थे सीएम योगी  योगी बुधवार की सुबह जब मुलायम सिंह यादव के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर मिलने पहुंचे तो पुरानी यादें ताजा हो गईं। योगी लोकसभा चुनाव के बाद भी मुलायम से मिलने गये थे। तब योगी के स्वागत में मुलायम के पुत्र, सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाई शिवपाल सिंह यादव समेत पूरा परिवार मौजूद था। इस बार अखिलेश नहीं थे। अखिलेश यादव की नामौजूदगी ने सवाल खड़े किये। दरअसल, अखिलेश यादव अब भाजपा पर आक्रामक हैं और वह किसी भी हाल में मोर्चे पर जमे रहना चाहते हैं। हाल के विधानसभा उप चुनाव के नतीजों ने भी अखिलेश का उत्साह बढ़ाया है। दूसरी ओर शिवपाल सिंह यादव के प्रति योगी सरकार मेहरबान भी रही है। उनके लिए पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बंगला आवंटित किये जाने और व्यक्तिगत तौर पर उनके आइएएस दामाद की उप्र में प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ाए जाने जैसे कुछ मामले हैं जिनके हवाले से अखिलेश भाजपा से शिवपाल की करीबी का दावा करते हैं। अपना विरोधी चेहरा बनाये रखने के लिए भी अखिलेश ने योगी से दूरी बनाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुलायम सिंह यादव की कुशलक्षेम पूछी। करीब 25 मिनट तक उनके आवास पर रहे योगी ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता आपसी व्यवहार में नहीं आनी चाहिए।

कल्याण सिंह के आवास पर भी पहुंचे योगी  योगी ने मुलायम से मिलने के बाद माल एवेन्यू स्थित राज्यमंत्री संदीप सिंह के आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मुलाकात की और कुशलक्षेम पूछा। इस मौके पर कल्याण के पुत्र और एटा के भाजपा सांसद राजवीर सिंह राजू भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलायम सिंह और कल्याण सिंह को कुंभ 2019 से संबंधित पुस्तक व मिठाई भेंट की।उल्लेखनीय है कि नवंबर-दिसंबर का महीना अयोध्या के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। कल्याण सिंह की सरकार में अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस हुआ था, जबकि मुलायम सिंह की सरकार में कारसेवकों पर गोली चली थी।

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