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कोरोना संकट के दौरान रेलवे आमदनी बढ़ाने के तलाश रहा नए विकल्प

नई दिल्ली । कोरोना संकट के दौरान रेलवे आमदनी बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रहा है। इसी कड़ी में माल ढुलाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को रेल मार्ग से माल ढुलाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिसके परिणाम भी दिखने लगे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली से पश्चिम बंगाल के चाय बगानों के लिए जैविक खाद भेजी जा है।

आदर्श नगर से पश्‍चिम बंगाल जाएगा जैविक खाद  दिल्ली के आदर्श नगर से जैविक खाद का लदान शुरू किया गया है। दो लघु मालगाड़ी के जरिये कुल 2667 टन खाद पश्चिम बंगाल भेजी गई है। इसका उपयोग वहां के चाय बागान में किया जाना है। अधिकारियों का कहना है कि उर्वरक खाद की ढुलाई मालगाड़ियों के जरिये पहले से हो रही है, लेकिन दिल्ली मंडल पहली बार जैविक खाद भी एक से दूसरे स्थान पर भेज रहा है। इससे जैविक खाद के कारोबार में तेजी आएगी।

जैविक कृषि को मिलेगा बढ़ावा  जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा। यह पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिहाज से भी अच्छा है। एक मालगाड़ी में कुल 42 डिब्बे होते हैं। छोटे कारोबारियों के जरूरत को ध्यान में रखकर 21 या इससे भी कम डिब्बों वाली लघु मालगाड़ी चलाई जा रही है।

जैविक खाद के अलावा हो रही चीनी की ढुलाई चीनी की ढुलाई को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुरादाबाद मंडल ने बिजनौर, मुरादाबाद और बरेली माल गोदामों से चीनी के 5 रैक नेपाल भेजे हैं। लगभग 8700 टन चीनी नेपाल भेजी गई है। इससे भारत व नेपाल के बीच संबंध मजबूत होंगे। चीनी की ढुलाई बढ़ाने के लिए मिनी रैक का भी उपयोग किया जा रहा है। मेरठ सिटी और सहारनपुर क्षेत्र से छोटी मालगाड़ी के जरिये लदान शुरू किया गया है।

व्यवसाय विकास इकाई का मिल रहा लाभ माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए उत्तर रेलवे में जोनल व मंडल स्तर पर कुल छह व्यवसाय विकास इकाई (बीडीयू) गठित की गई हैं। एक माह में उद्योगपतियों व कारोबारियों के साथ बीडीयू की 40 से ज्यादा बैठकें हुई हैं। इस प्रयास से पिछले माह दिल्ली मंडल को मुजफ्फरनगर स्थित एक चीनी मिल से 15 हजार चीनी की ढुलाई की गई। पहले इस मिल का प्रबंधन सड़क मार्ग से चीनी भेजता था।

आपदा को अवसर में बदला राष्ट्र कोरोना महामारी से लड़ रहा है। उत्तर रेलवे ने इस आपदा को एक अवसर के रूप में बदलते हुए माल परिवहन को सड़क से रेल यातायात की ओर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। जोनल और मंडल स्तर पर बीडीयू गठित करने के सकारात्माक परिणाम आने लगे हैं।

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