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CG Election 2018 : जीते हुए प्रत्याशियों को एक मिनट भी अकेला नहीं छोड़ना चाहती कांग्रेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने विधायकों के खरीद-फरोख्त की चिंता सता रही है। इस कारण जीते हुए प्रत्याशियों को एक मिनट भी अकेले नहीं छोड़ा जाएगा, तत्काल उनके पीछे पार्टी की टीम लग जाएगी। हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व की कोशिश रहेगी कि बिना देर किए विधायकों को सुरक्षित स्थान पर नजरबंद कर दिया जाए। पिछले दिनों दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में रणनीति बन चुकी है। उस पर जिला स्तर पर काम भी शुरू हो चुका है। कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में 28 नवंबर को प्रदेश प्रभारी पुनिया, पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 90 प्रत्याशियों की बैठक हुई थी। उसमें सभी प्रत्याशियों से कहा गया था कि चुनाव का नतीजा घोषित होते ही वे रायपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। प्रत्याशियों को बिना देर किए रायपुर बुलाना, यह रणनीति का ही हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि विजयी प्रत्याशी (विधायक) एक रात भी अपने क्षेत्र में रुके तो उन्हें दबाव में लेने या खरीदने की कोशिश हो सकती है। विधायकों के यहां आने के बाद क्या करना है, यह दिल्ली में तय हो चुका है। जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया आने वाले हैं, जो कि आगे की रणनीति पर काम करेंगे। प्रदेश में हुए पिछले तीन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कभी ऐसे काम नहीं किया है, जैसा इस बार रणनीति के साथ किया जा रहा है।

अंतिम समय में बदल भी सकता है प्लान अभी कहा गया है कि जीते हुए प्रत्याशियों को रायपुर आना है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंतिम समय में प्लान बदल भी सकता है। गोपनीय जगह तय करके यह कहा जा सकता है कि वे सीधे वहीं पहुंचे।

हर जिले में बन रही टीम हर जिले में टीम बनाई जा रही है, जो नतीजा घोषित होते ही अपने क्षेत्र के विधायकों के पीछे लग जाएगी। विधायक को भी बता दिया जाएगा कि उन्हें टीम के साथ रहना है। टीम में प्रदेश और जिले के पदाधिकारी रहेंगे। उनका काम विधायक को तय स्थान तक पहुंचाने का होगा। विधायकों के मोबाइल फोन पर भी नजर रहेगी।

प्रदेश में पहले हो चुकी है खरीद-फरोख्त  छत्तीसगढ़ बनने के बाद 2002 में भाजपा के 12 विधायक खरीदने का मामला सामने आया था। विधायकों के खरीद-फरोख्त का आरोप तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर लगा था। इसके बाद 2014 में अंतागढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव था, अंतिम समय में कांग्रेस के प्रत्याशी मंतूराम पवार ने नाम वापस ले लिया था, तब कांग्रेस को एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देना पड़ा था, जो हार गया था। अंतागढ़ की ऑडियो सीडी सामने आई थी, उसके बाद से कांग्रेस प्रत्याशी खरीद का मामला बताकर जांच की मांग कर रही है।

भाजपा को तोड़ने की हुई थी कोशिश  2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी चुनाव हार गई थी। भाजपा सरकार बनाने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान भाजपा के विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई थी। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी का नाम आया था, लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा ने इसका भंडाफोड़ कर दिया। इसकी सीबीआइ जांच भी हुई थी।

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