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भारत में पहली बार 16वीं जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही

नई दिल्ली। भारत में पहली बार 16वीं जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। डिजिटल होने की वजह से विभिन्न पैरामीटर पर जनगणना के आंकड़े एक से दो साल के भीतर जारी कर दिये जाएंगे। इसके पहले कागज पर जुटाए आंकड़ों की पूरी रिपोर्ट जारी करने में आठ से 10 साल तक लग जाते थे। 2011 में हुई जनगणना के कई मानकों पर आखिरी रिपोर्ट अब तक पूरी नहीं हो पाई है। रिपोर्ट वक्त से आने पर सरकार को जरूरतमंद वर्गो के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। जनगणना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डिजिटल डाटा जुटाने के लिए जनगणना में लगे 30 लाख से अधिक कर्मचारी एनड्रायड पर आधारित स्मार्टफोन या टैब का प्रयोग करेंगे। इसके लिए विशेष एप विकसित किया गया है। कर्मचारियों को सभी व्यक्तियों के आंकड़े इसी एप के सहारे डिजिटल फार्म में भरना होगा। सारे आंकड़े भरे जाने के बाद उसे सेव करते ही ये आंकड़े केंद्रीय स्तर पर कार्यरत सेंसस 2021 मैनेजमेंट एंड मॉनीटरिंग सिस्टम में सुरक्षित हो जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस ऐप को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह उन जगहों पर भी काम करेगा, जहां इंटरनेट का नेटवर्क नहीं होगा। ऐसी स्थिति में जनगणनाकर्मी इंटरनेट के नेटवर्क में आने के बाद आंकड़ों को सेव कर सकेंगे।

कागज पर जुटाए जाते थे आंकड़े इसके पहले 2011 की जनगणना में हर व्यक्ति से जुड़े आंकड़े को ए3 साइज के कागज पर जुटाया जाता है। इसके बाद एक-एक कागज को स्कैन कर उसे डिजिटल रूप में बदला जाता था। जाहिर है कि 2011 में 121 करोड़ लोगों के आंकड़े डिजिटल रूप में लाने में कई वर्ष लग गए थे। इसके बाद इन आंकड़ों का अलग-अलग पैरामीटर पर विश्लेषण किया जाता है, जिसे समय-समय पर रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया जारी करता है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2011 के आंकड़ों का विश्लेषण इस साल तक चल रहा है। इससे सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि जब सरकार किसी एक पैरामीटर पर गरीबों के लिए कोई योजना बनाती है, तबतक ये आंकड़े बदल चुके होते हैं। ऐसे में सभी जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता है।

इस बार कितनी अलग होगी जनगणना इस बार कई नए पैरामीटर जनगणना के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। जिनमें मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, इंटरनेट का उपयोग तक शामिल है। यह भी देखा जाएगा कि लोगों के घर की छत, दीवारें और फर्श किस चीज की बनी है। साथ ही परिवार में गैस, बिजली और पानी के उपयोग के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। यह भी पूछा जा रहा है कि किरायेदार के अलावा जो अपने अपने घर में रह रहे हैं, वह घर परिवार के किस सदस्य के नाम पर है और परिवार के किस-किस सदस्य के बैंक में खाते हैं। यदि एक-डेढ़ साल के भीतर देश के सभी नागरिकों से इस तरह के आंकड़े मिल जाते हैं, तो जाहिर है सरकार के लिए उनके विकास की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।

देश में सभी घरों की होगी मैपिंग वैसे हर बार की तरह इस बार भी जनगणना तीन चरणों में पूरी की जाएगी। प्रथम चरण में 2020 में अप्रैल से सितंबर के बीच जनगणनाकर्मी पूरे देश में सभी घरों की मैपिंग करेंगे, जिसमें घर में रहने वाले परिवार के पास पशुओं की संख्या आदि के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसी दौरान एनपीआर से जुड़े आंकड़े भी एकत्रित किये जाएंगे। असली जनगणना दूसरे चरण में 2021 को नौ फरवरी से 28 फरवरी के बीच होगी, जब जनगणनाकर्मी देश में रहने वाले एक-एक व्यक्ति की जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद एक मार्च से सात मार्च तक तीसरे चरण में दूसरे चरण की जानकारियों की पुष्टि की जाएगी और यदि नौ से 28 फरवरी के बीच पैदा हुए बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

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