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अटकलों का दौर हुआ खत्म,राहुल गांधी अभी बने रहेंगे कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष

नई दिल्‍ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी Lok Sabha Election 2019 में पार्टी की हार के बाद से ही अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। बुधवार को उनके इस्तीफे की कॉपी मीडिया के सामने आयी। चार पेज के इस इस्तीफे में राहुल गांधी ने सबसे पहले हार की खुद जिम्मेदारी ली है और कहा है कि पार्टी की भविष्य की ग्रोथ के लिए जवाबदेही जरूरी है। हालांकि, अब कांग्रेस के बड़े नेताओं की माने तो राहुल गांधी अभी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे। समाचार एजेंसी ANI ने कांग्रेस लीडर्स के हवाले से बताया कि जब तक कांग्रेस कार्य समिति राहुल के इस्तीफे को स्वीकार नहीं कर लेती है, तब तक राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मोतीलाल वोरा की रिपोर्ट गलत बताया गया है। बता दें कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, सुशील कुमार शिंदे, अशोक गहलोत में से किसी को पार्टी की कमान सौपी जा सकती है। वहीं, इनमें  मोतीलाल वोरा का नाम सबसे आगे चल रहा था। हालांकि, खुद को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की खबरों पर मोतीलाल वोहरा ने कह दिया था कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।

इस्तीफे में सरकार पर बोला हमला
अपने इस्तीफे में भी उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलने का मौका नहीं गंवाया। उन्होंने इस्तीफे में लिखा कि Loksabha Election 2019 में वह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की उन संस्थाओं के खिलाफ चुनाव लड़े, जिन्हें विपक्ष के विरोध में खड़ा किया गया था। अपने इस्तीफे में राहुल गांधी ने लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी का इतिहास शानदार रहा है। मुझे विश्वास है कि पार्टी ऐसे नेतृत्व का चुनाव करेगी जो निर्भीकता, प्यार और सत्यनिष्ठा से पार्टी को आगे ले जाने का काम करेगी। हमारी लड़ाई आसान नहीं थी। भाजपा के प्रति मेरे अंदर कोई गुस्सा और नफरत नहीं है, लेकिन मेरे रोम-रोम उनकी नफरत की राजनीति के खिलाफ है। वो जिस तरह के भारत की परिकल्पना करते हैं मैं उसके खिलाफ हूं। यह कोई नई लड़ाई नहीं है। यह हजारों सालों से चली आ रही है। जहां उन्हें विरोध दिखता है, मुझे वहीं समानता दिखती है। उन्हें जहां नफरत दिखती है, मुझे वहीं प्यार दिखता है।’ राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे में लिखा – ‘हमने 2019 का लोकसभा चुनाव किसी पार्टी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि देश की पूरी मशीनरी से लड़ा। हर उस संस्थान के खिलाफ लड़ा जिसे विपक्ष के खिलाफ खड़ा किया गया था। अब यह तो स्पष्ट है कि एक वक्त हमारे निष्पक्ष संस्थान अब निष्पक्ष नहीं रहे।’ इससे पहले उन्‍होंने बुधवार सुबह संवाददाताओं से बातचीत में यह बात एक बार फिर दोहराते हुए कहा था कि कांग्रेस को और अधिक देरी के बिना नए अध्यक्ष पर जल्द फैसला कर लेना चाहिए। मैंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है और मैं अब पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं। कांग्रेस कार्य समिति, सीडब्ल्यूसी (CWC) को जल्द से जल्द बैठक बुलाकर फैसला करना चाहिए।बता दें कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्‍होंने कहा था कि गांधी परिवार से बाहर के किसी शख्स को अध्यक्ष बनना चाहिए। हालांकि, इस दौरान कांग्रेस नेता उन्‍हें मनाते रहे लेकिन उनकी कोशिश अब विफल साबित होती हुई दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने बुधवार को संवाददाताओं से साफ कर दिया कि वह इस्तीफे के फैसले पर अडिग हैं।  बीते दिनों कांग्रेस शासित मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक में भी राहुल ने अपना फैसला वापस लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इसके बाद कांग्रेस के मुख्‍यमंत्रियों ने राहुल से खुद अपना उत्‍तराधिकारी तय करने की बात कह कर गेंद फिर उन्‍हीं के पाले में ही डाल दी थी। कांग्रेस अध्यक्ष के आवास 12 तुगलक लेन पर करीब दो घंटे तक चली बैठक के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने-अपने इस्तीफे की पेशकश भी की थी।  लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के त्यागपत्र के बाद पार्टी की प्रदेश कमेटी के ओहदेदारों के बीच भी पद छोड़ने की होड़ मच गई थी। उत्‍तर प्रदेश में प्रदेश इकाई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व पूर्व मंत्री रणजीत सिंह जूदेव पद छोड़ चुके हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस की कमान संभाल रहे अशोक चव्हाण ने लोकसभा चुनाव की नतीजे आने के बाद इस्तीफा दे दिया था। अब उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। इस बीच, वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को पार्टी का अगला अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर अटकलें चल रही हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि पार्टी ने लगभग सुशील कुमार शिंदे को अगला अध्यक्ष बनाने का मन बना लिया है। वैसे इस दौड़ में शामिल मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, जनार्दन द्विवेदी से लेकर एके एंटनी और मुकुल वासनिक के नाम पर भी चर्चा हो चुकी है।

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